आपके अपने अभियान में लाखों की संख्या में, भाई और बहन  बड़े ही उत्साह के साथ जुड़ चुके है और हर दिन और लोग जुड़ रहे है.

इस अभियान में किसी से भी, किसी भी प्रकार से कोई रुपया, पैसा, चंदा, दान, दक्षिणा, आदि  कुछ भी नहीं लिया जाता। 

अरे मेरे अभिमान, काम, क्रोध, लोभ, मोह मेरे पास आजा

मेरे पास ही बैठकर तू भी भगवान को बुला..

अरे मेरे अभिमान, काम, क्रोध, लोभ, मोह मेरे पास आजा, मेरे पास ही बैठकर तू भी भगवान को बुला..

यह तेरे लिए भी बहुत जरुरी है क्योंकि जब मैं मर जाऊँगा, तो तुम भी तो मर जाओगे…मेरे शरीर को ही लोग जला देंगे, तो तुम किसमें रहोगे?

भगवान! तू समय कालचक्र के वश में नहीं है

समय तेरे वश में है तू किसका इंतजार कर रहा है..

भगवान! तू समय कालचक्र के वश में नहीं है

समय तेरे वश में है तू किसका इंतजार कर रहा है..
आ तुरंत आ.. भगवान प्लीज तुरंत प्रगट हो

हे भगवान! जो आपको परमसर्वोत्तम लगे सो तुरंत से तुरंत

मेरे सोचने से भी पहले मुझसे जबरदस्ती करवा ले..

हे भगवान! हे सबके रचयिता.. हे सबके माँ-बाप.. हे सबके प्राणपति.. जिनसे बड़ा कहीं कोई है ही नहीं.. हे सबसे बड़े भगवान!

जो आपको परमसर्वोत्तम लगे
सो तुरंत से तुरंत मुझसे जबरदस्ती करवा ले..
परंतु भगवान प्लीज तुरंत प्रगट हो

मन को वश में करने की कुश्ती क्यों लड़ूँ..

मैं तो महाकमजोर तुझ परम माँ-बाप को ही बुला रहा हूँ..

मैं तो महाकमजोर तुझ परम माँ-बाप को ही बुला रहा हूँ..

मैं तो महाकमजोर तुझ परम माँ-बाप को ही बुला रहा हूँ..
आ जल्दी आ.. भगवान प्लीज तुरंत प्रगट हो..

कौन से भगवान को प्रगट कराना चाहते हो?

दिल पर हाथ रखकर किसी से भी सपने में भी पूछ लो तो भगवान के बारे में हरकोई एक ही बात कहेगा कि भाई वह तो एक ही है….. दो है ही नहीं.. बस उसी एक से हमारा निवेदन, प्रार्थना व पुकार है.. हमारा निवेदन केवलमात्र उस सर्वशक्तिमान भगवान से है जो हमारा सबका वास्तविक माँ-बाप है..जिसने सारा संसार, अनंतकोटि ब्रह्राण्ड रचाया.. बनाया है.. जिसे कोई ईश्वर, कोई अल्लाह, कोई खुदा तो कोई गॉड कहता है, परंतु पुकारते उसी एक को हैं..जिसके लिए किसी भी मजहब का व्यक्ति क्यों ना हो.. किसी भी भाषा का व्यक्ति क्यों ना हो, सभी के सभी एक स्वर में कहते हुए पाये जाते हैं कि “वह है तो एक ही है..” उस एक को हम पुकार रहे हैं.. जो हमारे आने से पहले भी था.. आज भी है तथा हमारे जाने के बाद भी रहेगा.. जो हरकण.. हर..हर.. हर.. “हरकुछ” का वास्तविक रचयिता है.. उस परम माँ-बाप.. परमप्राणपति.. परम जगत के आधार, परमसत्ता.. परम सबकुछ को प्रगट रहने वास्ते पुकार लगा रहे हैं..। जिसे हम कहीं से भी, कभी भी, किसी भी नाम से, कैसे भी पुकार लगा सकते हैं.. जिसके लिए सभी कहते हैं कि वह हरसमय.. हरजगह.. मौजूद है.. हजार आँखों-कानों से देखता-सुनता है..वह सुनता है इसलिए सुना रहे हैं.. उसे प्रगट रहनेवास्ते पुकार रहे हैं.. भगवान प्लीज तुरंत प्रगट होवो.. भगवान प्लीज तुरंत प्रगट होवो..

  • जब हम भगवान को पेट दर्द ठीक करने के लिए रात के 2बजे भी पुकार लगा सकते हैं तो प्रगट होनेवास्ते क्यों नहीं..? हाँ जरुर पुकार सकते हैं.. कभी भी पुकार सकते हैं..
  • भगवान को हम सभी माता-पिता कहते हैं (त्वमेव माता च पिता त्वमेव..) फिर ये प्रश्न कहाँ कि हम भगवान को पहचानेंगे कैसे? क्योंकि कोई भी बच्चा माँ-बाप को पहचानने कहीं किसी स्कूल में नहीं जाता है.. माँ-बाप खुद ही पहचान कराते हैं..
  • जब भगवान स्वयं कहते हैं कि मैं कर्तुम् अकर्तुम् अन्यथा अकर्तुम् परमसमर्थ हूँ तो उनके लिए भला सबको बिना भ्रम के दिखते, सबसे बातचीत करते, सबको आनंदित-परमानंदित करते-कराते, सदा-सदा के लिए प्रगट रह पाना क्या मुश्किल है? नहीं, कदापि नहीं..। हम पुकारें तो सही.. भगवान प्लीज तुरंत प्रगट होवो..

क्या इस प्रकार भगवान को प्रगट कर पाना संभव है?

जी हाँ, हम जानते हैं  कि ऐसे.. भगवान प्रगट हो.. भगवान प्रगट हो.. करने से भगवान प्रगट नहीं होंगे.. परंतु कभी-कभी व्यक्ति स्वयं जानते हुए भी असंभव प्रयास करता है जैसे कि मान लो किनारे से हजारों मील दूर समुद्र में कोई डूब रहा है.. वह व्यक्ति यह जानते हुए कि तैरकर हजार किमी दूर किनारे तक पहुँच पाना निरा असंभव है फिर भी जी-जान लगाकर भी हाथ-पैर मारता है.. बचने का प्रयास करता है.. ठीक वैसे ही हम भी यह जानते हुए कि असंभव है फिर भी भगवान को प्रगट रहनेवास्ते पुकार लगा रहे हैं.. भगवान प्लीज तुरंत प्रगट होवो.. क्योंकि यह हमारी परमजरुरत है..

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4MAY2010